History: 185 MCQs with Answers
Your Progress
0%History MCQ Questions in Hindi
इतिहास से संबंधित बहुविकल्पीय प्रश्न — प्राचीन, मध्यकालीन, आधुनिक भारत तथा विश्व इतिहास।
Q171. निम्नांकित अधिकारियों में से कौन - सा अधिकारी अलाउद्दीन खिलजी की बाजार नियन्त्रण नीति से सम्बन्धित नहीं है ?
Right Answer: मुस्तौफी - ए - मुमालिक
अलाउद्दीन खलजी की बाजार नियन्त्रण नीति सल्तनतकालीन आर्थिक प्रशासन की सर्वाधिक चर्चित व्यवस्था थी। इसके संचालन हेतु दीवान-ए-रियासत नामक विभाग बना, जिसका प्रमुख अधिकारी मलिक याकूब था। शहना-ए-मण्डी बाजार का अधीक्षक होता था और मूल्य-नियंत्रण लागू करवाता था, जबकि बरीद-ए-मण्डी तथा मुनहियान गुप्तचर के रूप में बाजार की दैनिक सूचनाएँ सीधे सुल्तान तक पहुँचाते थे। मुस्तौफी-ए-मुमालिक साम्राज्य का महालेखा परीक्षक था, जिसका सम्बन्ध वित्तीय लेखा-परीक्षण से था, बाजार नियन्त्रण से नहीं। अलाउद्दीन ने अनाज, वस्त्र, दास तथा घोड़ों तक के मूल्य निश्चित किए और इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य कम वेतन पर विशाल स्थायी सेना रखना था, जैसा जियाउद्दीन बरनी ने लिखा है।
Q172. निम्नांकित शासकों में से किस शासक ने बृहदीश्वर मन्दिर का निर्माण करवाया ?
Right Answer: राजराज प्रथम
तंजावुर का बृहदीश्वर मन्दिर चोल शासक राजराज प्रथम ने 1010 ईस्वी में पूर्ण करवाया और इसीलिए इसे राजराजेश्वर मन्दिर भी कहा जाता है। यह द्रविड़ स्थापत्य शैली का चरमोत्कर्ष माना जाता है। इसका विमान लगभग साठ मीटर ऊँचा है और शिखर पर रखा एकाश्म कलश कई टन भारी है। मन्दिर में विशाल नन्दी प्रतिमा तथा चोलकालीन भित्तिचित्र भी हैं। इसे यूनेस्को ने ‘महान चोल मन्दिर’ के अन्तर्गत विश्व धरोहर घोषित किया है। राजेन्द्र प्रथम ने आगे चलकर गंगईकोण्डचोलपुरम में इसी शैली का मन्दिर बनवाया।
Q173. निम्नांकित गुरुओं में से ‘‘खालसा पंथ’’ के संस्थापक कौन थे ?
Right Answer: गुरु गोविन्द सिंह
खालसा पंथ की स्थापना सिखों के दसवें गुरु गोविन्द सिंह ने 1699 की बैसाखी के दिन आनन्दपुर साहिब में की। उन्होंने एकत्रित संगत में से पाँच व्यक्तियों को ‘पंज प्यारे’ के रूप में चुना और उन्हें खाण्डे-बाटे का अमृत छकाया। खालसा के सदस्यों के लिए पाँच ककार — केश, कंघा, कड़ा, कच्छा तथा कृपाण — धारण करना अनिवार्य किया गया और पुरुषों के नाम के साथ ‘सिंह’ तथा स्त्रियों के नाम के साथ ‘कौर’ जोड़ा गया। इससे सिख समुदाय एक संगठित सैन्य-धार्मिक शक्ति में बदल गया, जो मुगल उत्पीड़न का प्रतिरोध कर सका।
Q174. निम्न में से किस अभिलेख से स्थापित होता है कि हर्ष ने वल्लभी शासक ध्रुवसेन II को परास्त किया था ?
Right Answer: नवसारी ताम्रपत्र अभिलेख
वल्लभी के मैत्रक शासक ध्रुवसेन द्वितीय को हर्षवर्धन ने पराजित किया था, इसका प्रमाण नवसारी ताम्रपत्र अभिलेख से मिलता है। बाद में हर्ष ने अपनी पुत्री का विवाह ध्रुवसेन द्वितीय से करके उसे अपना मित्र एवं सामन्त बना लिया, जिससे पश्चिमी सीमा सुरक्षित हो गई। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी वल्लभी की समृद्धि तथा हर्ष से उसके सम्बन्ध का उल्लेख किया है। ऐहोल अभिलेख चालुक्य पुलकेशिन द्वितीय द्वारा हर्ष की पराजय का वर्णन करता है, जबकि बांसखेड़ा तथा मधुबन ताम्रपत्र स्वयं हर्ष के जारी किए गए भूमिदान-अभिलेख हैं।
Q175. निम्न में से किस स्थल से 'R-37' कब्रिस्तान मिला था ?
Right Answer: हड़प्पा
हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख स्थल हड़प्पा से ‘कब्रिस्तान आर-37’ नामक शवाधान क्षेत्र प्राप्त हुआ है, जो परिपक्व हड़प्पा काल का है। यहाँ शवों को सामान्यतः उत्तर-दक्षिण दिशा में सिर उत्तर की ओर रखकर पूर्ण समाधि दी जाती थी और उनके साथ मृद्भाण्ड, आभूषण तथा दैनिक उपयोग की वस्तुएँ रखी जाती थीं, जो परलोक सम्बन्धी विश्वास का संकेत देती हैं। इसी स्थल से ‘कब्रिस्तान एच’ भी मिला है, जो उत्तर हड़प्पा काल का है और जहाँ अस्थियों को कलश में रखने की भिन्न परम्परा दिखाई देती है। हड़प्पा का उत्खनन 1921 में दयाराम साहनी ने करवाया।
Q176. मध्यकालीन भारत में बयाना किस उत्पादन के लिए प्रसिद्ध था ?
Right Answer: नील
मध्यकालीन भारत में आगरा के निकट स्थित बयाना उत्तम कोटि के नील उत्पादन के लिए विख्यात था। बयाना का नील अपनी गहरी रंगत के कारण गुजरात के सरखेज के नील से भी श्रेष्ठ माना जाता था और यूरोपीय व्यापारी उसके लिए ऊँची कीमत देने को तैयार रहते थे। अंग्रेज तथा डच ईस्ट इण्डिया कम्पनियों ने सत्रहवीं शताब्दी में यहाँ नियमित क्रय-केन्द्र स्थापित किए। जहाँगीर के काल में नील के व्यापार पर एकाधिकार देने के प्रयास भी हुए। यूरोप के वस्त्र उद्योग में इसकी भारी माँग थी और यह भारत के प्रमुख निर्यातों में गिना जाता था।
Q177. दन्तिदुर्ग ने किस चालुक्य नरेश को पराजित किया और महाराष्ट्र में राष्ट्रकूट शासन की शुरूआत हुई ?
Right Answer: कीर्तिवर्मन द्वितीय
राष्ट्रकूट वंश की वास्तविक स्थापना दन्तिदुर्ग ने की, जिसने लगभग 753 ईस्वी में बादामी के चालुक्य नरेश कीर्तिवर्मन द्वितीय को पराजित कर महाराष्ट्र में राष्ट्रकूट सत्ता स्थापित की। इससे पूर्व राष्ट्रकूट चालुक्यों के सामन्त थे। दन्तिदुर्ग ने उज्जैन में हिरण्यगर्भ महादान का अनुष्ठान किया और ‘महाराजाधिराज परमेश्वर’ की उपाधि धारण की। उसके उत्तराधिकारी कृष्ण प्रथम ने एलोरा का विश्वप्रसिद्ध कैलाश मन्दिर एक ही चट्टान को काटकर बनवाया। आगे चलकर राष्ट्रकूट कन्नौज के त्रिपक्षीय संघर्ष में प्रतिहारों तथा पालों के प्रमुख प्रतिद्वन्द्वी बने।
Q178. निम्न में से किसने अवन्ति की विजय की थी ?
Right Answer: शिशुनाग
मगध साम्राज्य के विस्तार में अवन्ति की विजय एक निर्णायक घटना थी। हर्यक वंश के पतन के बाद शिशुनाग ने मगध की सत्ता सँभाली और उसने अवन्ति के प्रद्योत वंश का अन्त कर उसे मगध में मिला लिया। इससे मगध तथा अवन्ति का लम्बा संघर्ष सदा के लिए समाप्त हो गया और मगध उत्तर भारत की सर्वप्रमुख शक्ति बन गया। शिशुनाग ने कुछ समय के लिए राजधानी राजगृह से हटाकर वैशाली भी की। उसके पुत्र कालाशोक के शासनकाल में वैशाली में द्वितीय बौद्ध संगीति हुई। बिम्बिसार तथा अजातशत्रु ने अंग एवं वज्जि संघ पर विजय पाई थी।
Q179. किस प्रतिहार शासक के शासनकाल में प्रसिद्ध ग्रन्थ ‘‘कुवलयमाला’’ की रचना की गई ?
Right Answer: वत्सराज
‘कुवलयमाला’ नामक प्राकृत चम्पू-कथा की रचना जैन आचार्य उद्योतन सूरि ने 778 ईस्वी में की। ग्रन्थ की प्रशस्ति के अनुसार इसकी रचना राजस्थान के जालोर में गुर्जर-प्रतिहार शासक वत्सराज के शासनकाल में पूर्ण हुई। यह कृति तत्कालीन समाज, व्यापार, नगर-जीवन तथा भाषाओं के अध्ययन के लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्रोत है, क्योंकि इसमें अठारह देशी भाषाओं तथा विभिन्न प्रदेशों के लोगों की बोलियों के नमूने दिए गए हैं। वत्सराज कन्नौज के त्रिपक्षीय संघर्ष में सम्मिलित प्रमुख प्रतिहार शासक था, जिसे राष्ट्रकूट ध्रुव ने पराजित किया।
Q180. विजयनगर साम्राज्य के शासक कृष्णदेव राय निम्नांकित में से किस वंश से सम्बन्धित थे ?
Right Answer: तुलुव वंश
विजयनगर साम्राज्य पर क्रमशः चार वंशों ने शासन किया — संगम, सलुव, तुलुव तथा अरविदु। कृष्णदेव राय तुलुव वंश के थे और 1509 से 1529 तक शासन करते हुए उन्होंने साम्राज्य को चरम उत्कर्ष पर पहुँचाया। उन्होंने उड़ीसा के गजपति तथा बीजापुर के शासकों को पराजित किया और रायचूर दोआब पर अधिकार किया। वे स्वयं विद्वान थे और उन्होंने तेलुगु में ‘आमुक्तमाल्यद’ की रचना की; उनके दरबार में ‘अष्टदिग्गज’ नामक आठ तेलुगु कवि रहते थे। पुर्तगाली यात्री डोमिंगो पेस तथा बारबोसा ने उनके शासन का विस्तृत विवरण दिया है।