History: 185 MCQs with Answers
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इतिहास से संबंधित बहुविकल्पीय प्रश्न — प्राचीन, मध्यकालीन, आधुनिक भारत तथा विश्व इतिहास।
Q151. सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही विकल्प चुनिए :
सूची-I
A. इलाहाबाद की संधि
B. मद्रास की संधि
C. मैंगलोर की संधि
D. श्रीरंगपट्टम की संधि
सूची-II
(i) 1792 ई०
(ii) 1765 ई०
(iii) 1784 ई०
(iv) 1769 ई०
Right Answer: (A)-(ii), (B)-(iv), (C)-(iii), (D)-(i)
इलाहाबाद की संधि 1765 में बक्सर युद्ध के बाद क्लाइव ने शाह आलम द्वितीय तथा शुजाउद्दौला से की, जिससे कम्पनी को बंगाल, बिहार एवं उड़ीसा की दीवानी मिली। मद्रास की संधि 1769 में प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध के अन्त में हैदर अली से हुई और इसमें विजित प्रदेश लौटाकर पारस्परिक सहायता तय हुई। मैंगलोर की संधि 1784 में द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध के बाद टीपू सुल्तान से हुई। श्रीरंगपट्टम की संधि 1792 में तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध के बाद हुई, जिसमें टीपू को आधा राज्य तथा भारी युद्ध-क्षतिपूर्ति देनी पड़ी और दो पुत्र बन्धक रखने पड़े।
Q152. किस सन्धि के द्वारा द्वितीय अफीम युद्ध समाप्त हुआ ?
Right Answer: बीजिंग (पीकिंग) समझौता
द्वितीय अफीम युद्ध 1856 से 1860 तक चीन तथा ब्रिटेन एवं फ्रांस की संयुक्त सेनाओं के बीच लड़ा गया और इसका अन्त 1860 के बीजिंग अर्थात् पीकिंग समझौते से हुआ। इसके अनुसार चीन ने कॉउलून प्रायद्वीप ब्रिटेन को सौंपा, तिन्तसिन को व्यापार हेतु खोला, अफीम व्यापार को वैध किया, ईसाई मिशनरियों को स्वतंत्रता दी तथा भारी क्षतिपूर्ति चुकाई। 1858 की तिन्तसिन की सन्धि युद्ध के मध्य हुई थी, जिसे चीन ने अनुसमर्थित नहीं किया, इसलिए संघर्ष पुनः भड़का। नानकिंग की सन्धि 1842 में प्रथम अफीम युद्ध के बाद हुई थी।
Q153. यूरोपीय सामन्तवाद में राजा द्वारा सामन्तों को दी जाने वाली भूमि (जागीर) को कहा जाता था :
Right Answer: फीफ
यूरोपीय सामन्तवाद की व्यवस्था में राजा अथवा बड़ा स्वामी अपने अधीनस्थ सामन्त को जो भूमि अथवा जागीर प्रदान करता था, उसे फीफ कहा जाता था। बदले में सामन्त उसे सैन्य सेवा, निश्चित संख्या में घुड़सवार तथा परामर्श देने का वचन देता था। इस सम्बन्ध को स्थापित करने के लिए दो औपचारिक अनुष्ठान होते थे — होमेज, जिसमें सामन्त घुटनों के बल बैठकर स्वयं को स्वामी का व्यक्ति घोषित करता था, और फिडेलिटी, जिसमें वह निष्ठा की शपथ लेता था। इससे भिन्न एलोडियम वह भूमि थी जिस पर किसी स्वामी का कोई दावा नहीं होता था।
Q154. हाइरोग्लाफिक लिपि सम्बन्धित है :
Right Answer: प्राचीन मिस्र
हाइरोग्लाफिक लिपि प्राचीन मिस्र की चित्रात्मक लेखन प्रणाली थी, जिसका प्रयोग लगभग ईसा पूर्व 3200 से मन्दिरों, स्मारकों तथा मकबरों के अभिलेखों में हुआ। इसमें चित्र-संकेत कभी वस्तु का, कभी ध्वनि का और कभी अर्थ-निर्धारक का काम करते थे। उन्नीसवीं शताब्दी तक यह लिपि अपठनीय रही, किन्तु नेपोलियन के मिस्र अभियान के दौरान मिली रोसेटा शिला के आधार पर फ्रांसीसी विद्वान ज्याँ फ्रांस्वा शाम्पोलियों ने 1822 में इसे पढ़ने में सफलता पाई। मेसोपोटामिया की लिपि कीलाक्षर अर्थात् क्यूनिफॉर्म कहलाती थी।
Q155. मानव के प्रारम्भिक विकासकाल को इस नाम से भी जाना जाता है :
Right Answer: प्रागैतिहासिक काल
मानव के प्रारम्भिक विकासकाल को प्रागैतिहासिक काल कहा जाता है। यह वह सुदीर्घ अवधि है जिसके विषय में कोई लिखित साक्ष्य उपलब्ध नहीं है, क्योंकि तब तक लिपि का आविष्कार नहीं हुआ था। इस काल का समस्त ज्ञान पाषाण उपकरणों, अस्थि-अवशेषों, गुफा-चित्रों तथा मृद्भाण्डों जैसे पुरातात्त्विक साक्ष्यों से ही प्राप्त होता है। इसे उपकरण-प्रौद्योगिकी के आधार पर पुरापाषाण, मध्यपाषाण तथा नवपाषाण कालों में बाँटा जाता है। जिस काल के लेख तो मिलते हैं किन्तु पढ़े नहीं जा सके, उसे आद्य-ऐतिहासिक काल कहा जाता है।
Q156. सिन्ध के राजा दाहिर और मुहम्मद बिन कासिम के मध्य लड़े गए प्रसिद्ध युद्ध का नाम बताइए :
Right Answer: रावर
सिन्ध के ब्राह्मण शासक राजा दाहिर तथा उमय्यद सेनापति मुहम्मद बिन कासिम के बीच निर्णायक युद्ध 712 ईस्वी में रावर के मैदान में सिन्धु नदी के तट पर लड़ा गया। इसी युद्ध में दाहिर वीरगति को प्राप्त हुआ और सिन्ध पर अरबों का अधिकार हो गया। इससे पूर्व मुहम्मद बिन कासिम देवल तथा सेहवान जीत चुका था और रावर के बाद उसने ब्राह्मणाबाद तथा मुल्तान पर अधिकार किया। यह अभियान इराक के गवर्नर हज्जाज बिन युसुफ के निर्देश पर हुआ था। भारत में यह प्रथम सफल अरब आक्रमण था, यद्यपि इसका राजनीतिक प्रभाव सीमित रहा।
Q157. निम्न में से कौन - सा भवन फतेहपुर सीकरी में अवस्थित नहीं है ?
Right Answer: जहाँगीरी महल
फतेहपुर सीकरी की स्थापना अकबर ने 1571 में शेख सलीम चिश्ती के सम्मान में की और लगभग पन्द्रह वर्ष तक यह मुगल राजधानी रही। यहाँ लाल बलुआ पत्थर से बने बुलन्द दरवाजा, पंचमहल, दीवान-ए-खास, जोधाबाई महल, बीरबल का मकान, तुर्की सुल्ताना की कोठी तथा सलीम चिश्ती का मकबरा प्रमुख भवन हैं। जहाँगीरी महल इनमें सम्मिलित नहीं है, क्योंकि वह आगरा के लाल किले में स्थित है। अकबर ने उसे अपने पुत्र सलीम अर्थात् जहाँगीर के लिए बनवाया था और उसकी वास्तुकला में राजपूत शैली का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है।
Q158. बौद्ध संघ में प्रवेश को कहा जाता था :
Right Answer: प्रव्रज्जा
बौद्ध संघ में प्रवेश की प्रक्रिया को प्रव्रज्या कहा जाता था, जिसका शाब्दिक अर्थ है घर छोड़कर आगे बढ़ जाना। इसके पश्चात् व्यक्ति श्रामणेर अर्थात् नवदीक्षित बनता था। पूर्ण भिक्षु बनने के लिए आगे चलकर उपसम्पदा नामक उच्च दीक्षा दी जाती थी, जिसके लिए न्यूनतम आयु बीस वर्ष निर्धारित थी। पातिमोक्ख भिक्षुओं के लिए बनाए गए आचार-नियमों की संहिता थी, जिसका पाठ प्रत्येक पक्ष के अन्त में होता था, और उपोसथ वह सामूहिक सभा थी जिसमें भिक्षु एकत्र होकर अपने दोषों की स्वीकारोक्ति करते थे।
Q159. निम्न में से किसने ‘‘वीर सिंह देव चरित्र’’ एवं ‘‘जहाँगीर जसचन्द्रिका’’ की रचना की थी ?
Right Answer: कवि केशवदास
‘वीरसिंह देव चरित्र’ तथा ‘जहाँगीर जसचन्द्रिका’ की रचना रीतिकाल के आचार्य कवि केशवदास ने की। वे ओरछा के बुन्देला शासक इन्द्रजीत सिंह तथा वीरसिंह देव के दरबारी कवि थे। ‘वीरसिंह देव चरित्र’ में उन्होंने अपने आश्रयदाता वीरसिंह देव के जीवन एवं पराक्रम का वर्णन किया, जबकि ‘जहाँगीर जसचन्द्रिका’ मुगल बादशाह जहाँगीर की प्रशस्ति में लिखी गई। केशवदास की सर्वाधिक प्रसिद्ध कृतियाँ ‘रसिकप्रिया’ तथा ‘कविप्रिया’ हैं, जिनके कारण उन्हें हिन्दी का प्रथम आचार्य कवि माना जाता है। ‘रामचन्द्रिका’ भी उनकी उल्लेखनीय रचना है, जिसमें राम-कथा का अलंकारप्रधान वर्णन मिलता है।
Q160. ‘एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति’ निम्नलिखित प्राचीन ग्रन्थों में से किस ग्रन्थ में उपरोक्त वक्तव्य का उल्लेख मिलता है ?
Right Answer: ऋग्वेद
‘एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति’ यह प्रसिद्ध सूक्ति ऋग्वेद के प्रथम मण्डल के 164वें सूक्त में आती है। इसका अर्थ है कि सत्य एक ही है, विद्वान उसे अनेक नामों से पुकारते हैं। यह वाक्य भारतीय चिन्तन की उस उदार एवं समन्वयवादी दृष्टि का प्रतीक माना जाता है जो विविध उपासना-पद्धतियों को एक ही परम सत्य तक पहुँचने के भिन्न मार्ग मानती है। ऋग्वेद चारों वेदों में प्राचीनतम है, इसमें दस मण्डल तथा लगभग एक हजार अट्ठाईस सूक्त हैं और यह मुख्यतः देवताओं की स्तुति से सम्बद्ध है।