History: 185 MCQs with Answers
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इतिहास से संबंधित बहुविकल्पीय प्रश्न — प्राचीन, मध्यकालीन, आधुनिक भारत तथा विश्व इतिहास।
Q131. निम्न में से किसने ‘जीज - ए - मोहम्मद शाही’ का संकलन करवाया था ?
Right Answer: सवाई जय सिंह
‘जीज-ए-मोहम्मद शाही’ नामक खगोलीय सारणियों का संकलन आमेर के शासक सवाई जय सिंह द्वितीय ने करवाया और इसे मुगल बादशाह मुहम्मद शाह के नाम पर रखा। सवाई जय सिंह स्वयं कुशल खगोलशास्त्री थे और उन्होंने दिल्ली, जयपुर, उज्जैन, मथुरा तथा वाराणसी में जन्तर-मन्तर नामक पाँच वेधशालाएँ बनवाईं। उन्होंने यूरोपीय, अरबी एवं भारतीय तीनों खगोलीय परम्पराओं का अध्ययन किया और यह पाया कि प्रचलित सारणियों में त्रुटियाँ हैं। जयपुर नगर की योजनाबद्ध स्थापना भी 1727 में उन्होंने ही की थी।
Q132. निम्नलिखित बुद्धिजीवियों में से अमेरिका स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में किसने कहा - ‘‘या तो मुझे स्वतंत्रता दो या मृत्यु दो’’ ?
Right Answer: पेट्रिक हेनरी
‘‘या तो मुझे स्वतंत्रता दो या मृत्यु दो’’ यह प्रसिद्ध उद्घोष अमेरिकी क्रान्तिकारी नेता पेट्रिक हेनरी ने 23 मार्च 1775 को वर्जीनिया कन्वेंशन में सेंट जॉन चर्च, रिचमंड में दिए अपने भाषण के अन्त में किया था। वे उपनिवेशवासियों को ब्रिटेन के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष के लिए तैयार करना चाहते थे। इस भाषण ने अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम को वैचारिक बल दिया। जेम्स ओटिस ने ‘प्रतिनिधित्व के बिना कर नहीं’ का नारा दिया, सेमुअल एडम्स ने ‘सन्स ऑफ लिबर्टी’ का संगठन किया तथा थॉमस पेन ने ‘कॉमन सेंस’ लिखी।
Q133. रैयतवाड़ी भूमि बन्दोबस्त का प्रवर्तक कौन था ?
Right Answer: थॉमस मुनरो
रैयतवाड़ी भूमि बन्दोबस्त के प्रवर्तक थॉमस मुनरो थे, जिन्होंने कैप्टन रीड के साथ मिलकर इसे पहले बारामहल में और फिर मद्रास प्रेसीडेंसी में लागू किया। इस व्यवस्था में जमींदार जैसे बिचौलिये को हटाकर सरकार ने सीधे किसान अर्थात् रैयत से लगान वसूला और उसे भूमि का स्वामी माना गया। लगान की दर उपज के एक निश्चित अनुपात पर तय होती थी तथा प्रत्येक बीस से तीस वर्ष में पुनर्निर्धारण होता था। यह व्यवस्था मद्रास, बम्बई, असम तथा बरार में लागू हुई, किन्तु ऊँची लगान दरों के कारण किसान प्रायः ऋणग्रस्त हो जाते थे।
Q134. मानव सभ्यता के विकास में सर्वप्रथम किस धातु की खोज हुई ?
Right Answer: ताम्र
मानव सभ्यता के विकास में सर्वप्रथम खोजी गई धातु ताम्र अर्थात् ताँबा थी। इसका कारण यह है कि ताँबा प्रकृति में देशज अर्थात् शुद्ध धात्विक रूप में भी मिल जाता है, इसका गलनांक अपेक्षाकृत कम है और इसे पीटकर आसानी से आकार दिया जा सकता है। ताम्र के प्रयोग से आरम्भ हुए युग को ताम्रपाषाण काल कहा जाता है, जिसमें पत्थर और ताँबे दोनों के उपकरण साथ-साथ चलते रहे। आगे चलकर ताँबे में टिन मिलाकर अधिक कठोर मिश्रधातु कांसा बनाया गया और उसके बहुत बाद लोहे का प्रयोग आरम्भ हुआ।
Q135. फ्रांसीसी क्रांति के दौरान नेशनल असेम्बली द्वारा निम्नांकित में से किस दिन ‘‘मानवाधिकारों की घोषणा’’ की गई थी ?
Right Answer: 27 अगस्त 1789
फ्रांसीसी क्रान्ति के दौरान नेशनल असेम्बली ने 27 अगस्त 1789 को ‘मनुष्य एवं नागरिक के अधिकारों की घोषणा’ को अंगीकार किया। इसके सत्रह अनुच्छेदों ने स्वतंत्रता, सम्पत्ति, सुरक्षा तथा अत्याचार के प्रतिरोध को मनुष्य के नैसर्गिक एवं अविच्छेद्य अधिकार घोषित किया और कहा कि सभी मनुष्य जन्म से स्वतंत्र एवं अधिकारों में समान हैं। यह घोषणा रूसो एवं मॉन्टेस्क्यू के विचारों तथा अमेरिकी स्वतंत्रता घोषणा से प्रेरित थी। इससे पूर्व 20 जून को टेनिस कोर्ट की शपथ ली गई थी, 14 जुलाई को बैस्टिल का पतन हुआ तथा 4 अगस्त को सामन्ती विशेषाधिकार समाप्त किए गए।
Q136. इस्लाम से सम्बन्धित सिद्धान्त ‘सौम’ से तात्पर्य है :
Right Answer: इस्लाम के प्रत्येक अनुयायी को रमजान माह के दौरान सूर्योदय से सूर्यास्त तक उपवास (रोजा) रखना चाहिए।
इस्लाम के पाँच मूल स्तम्भ हैं — शहादा अर्थात् एकेश्वरवाद की गवाही, सलात अर्थात् दिन में पाँच बार नमाज, जकात अर्थात् धर्मार्थ दान, सौम अर्थात् रोजा और हज अर्थात् मक्का की तीर्थयात्रा। इनमें ‘सौम’ का अर्थ है उपवास, जिसके अनुसार प्रत्येक वयस्क एवं स्वस्थ मुसलमान को रमजान के पवित्र महीने में सूर्योदय से सूर्यास्त तक अन्न, जल तथा अन्य भोगों से विरत रहना चाहिए। इसका उद्देश्य आत्मसंयम, संवेदनशीलता एवं ईश्वर-स्मरण को बढ़ाना है। रमजान की समाप्ति पर ईद-उल-फितर मनाई जाती है।
Q137. निम्नलिखित को कालक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही विकल्प चुनिए :
A. सफदरजंग
B. शुजाउद्दौला
C. सादत अली खान
D. आसफउद्दौला
Right Answer: C, A, B, D
अवध की स्वायत्त रियासत की नींव सादत अली खान बुरहान-उल-मुल्क ने 1722 में रखी, जिन्हें मुगल बादशाह मुहम्मद शाह ने अवध का सूबेदार नियुक्त किया था। उनके बाद 1739 में उनके भानजे एवं दामाद सफदरजंग नवाब बने, जो दिल्ली दरबार में वजीर भी रहे। 1754 में शुजाउद्दौला गद्दी पर बैठे, जिन्हें 1764 के बक्सर युद्ध में अंग्रेजों से पराजय मिली और इलाहाबाद की संधि करनी पड़ी। 1775 में आसफउद्दौला नवाब बने, जिन्होंने राजधानी फैजाबाद से लखनऊ स्थानान्तरित की और बड़ा इमामबाड़ा बनवाया।
Q138. निम्नलिखित को कालक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही विकल्प चुनिए :
A. हार्टोग समिति
B. सर चार्ल्स वुड्स डिस्पैच
C. सेडलर कमीशन
D. सार्जेन्ट योजना
Right Answer: B, C, A, D
भारत में ब्रिटिशकालीन शिक्षा-सुधार के ये चार पड़ाव क्रमशः आते हैं। सर चार्ल्स वुड का डिस्पैच 1854 में आया, जिसे भारतीय शिक्षा का मैग्नाकार्टा कहा जाता है; इसी से कलकत्ता, बम्बई एवं मद्रास विश्वविद्यालयों की स्थापना का मार्ग खुला। सेडलर आयोग 1917 में कलकत्ता विश्वविद्यालय की समस्याओं की जाँच हेतु बना और उसने माध्यमिक शिक्षा तथा इंटरमीडिएट कॉलेजों पर बल दिया। हार्टोग समिति 1929 में बनी, जिसने प्राथमिक शिक्षा में अपव्यय एवं अवरोधन की समस्या उजागर की। सार्जेन्ट योजना 1944 में सार्वभौमिक निःशुल्क शिक्षा का चालीस वर्षीय खाका थी।
Q139. निम्नांकित में से 1943 ई० में सुभाषचन्द्र बोस ने किस द्वीप को ‘‘स्वराज द्वीप’’ नाम दिया था ?
Right Answer: निकोबार
30 दिसम्बर 1943 को सुभाषचन्द्र बोस पोर्ट ब्लेयर पहुँचे और जिमखाना मैदान में तिरंगा फहराकर अण्डमान-निकोबार को आजाद हिन्द सरकार के अधीन प्रथम स्वतंत्र भारतीय भूभाग घोषित किया। इस अवसर पर उन्होंने अण्डमान को ‘शहीद द्वीप’ तथा निकोबार को ‘स्वराज द्वीप’ नाम दिया। ये द्वीप उस समय जापानी अधिकार में थे और व्यवहार में प्रशासन जापानियों के ही हाथ रहा। स्वतंत्र भारत में 2018 में सरकार ने इन नामों को औपचारिक रूप से पुनर्जीवित किया, यद्यपि तब नाम क्रमशः रॉस, नील एवं हैवलॉक द्वीपों को दिए गए।
Q140. निम्नांकित यूनानी विद्वानों में से किसे यूनानी चिकित्सा शास्त्र का जनक कहा जाता है ?
Right Answer: हिपोक्रेटीज़
हिपोक्रेटीज को यूनानी चिकित्सा शास्त्र का जनक कहा जाता है। ईसा पूर्व पाँचवीं शताब्दी में कॉस द्वीप में जन्मे इस चिकित्सक ने रोग को दैवी प्रकोप मानने की परम्परा तोड़ी और उसे प्राकृतिक कारणों से समझाने का प्रयास किया। उन्होंने रोगी के लक्षणों का व्यवस्थित प्रेक्षण, अभिलेखन तथा पूर्वानुमान पर बल दिया और शरीर में चार द्रवों के सन्तुलन का सिद्धान्त प्रतिपादित किया। उनके नाम पर प्रचलित ‘हिपोक्रेटिक शपथ’ आज भी चिकित्सा नैतिकता का आधार मानी जाती है, जिसमें रोगी को हानि न पहुँचाने का संकल्प केन्द्रीय है।