History: 185 MCQs with Answers
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इतिहास से संबंधित बहुविकल्पीय प्रश्न — प्राचीन, मध्यकालीन, आधुनिक भारत तथा विश्व इतिहास।
Q161. निम्नलिखित में से किस शासक के ग्रामीण प्रशासन का विवरण उत्तरमेरूर अभिलेख में मिलता है ?
Right Answer: परान्तक प्रथम
उत्तरमेरूर अभिलेख चोल शासक परान्तक प्रथम के काल का है और यह तमिलनाडु के काँचीपुरम जिले में स्थित वैकुण्ठ पेरुमाल मन्दिर की दीवारों पर उत्कीर्ण है। यह चोलकालीन ग्रामीण स्वशासन का सर्वाधिक विस्तृत साक्ष्य प्रस्तुत करता है। इसमें ‘सभा’ नामक ग्राम-संस्था के निर्माण की विधि, वार्ड अर्थात् ‘कुडुम्बु’ के आधार पर सदस्यों के चयन, ‘कुडवोलै’ अर्थात् घड़े में से पर्ची निकालकर चुनाव करने की प्रणाली, सदस्यों की योग्यताएँ तथा अयोग्यताएँ और विभिन्न समितियों के कार्य विस्तार से वर्णित हैं।
Q162. निम्नलिखित युग्मों में से कौन - सा युग्म सही सुमेलित नहीं है ? महाजनपद राजधानी
Right Answer: चेदि - काम्पिल्य
बौद्ध ग्रन्थ अंगुत्तर निकाय में ईसा पूर्व छठी शताब्दी के सोलह महाजनपदों की सूची मिलती है। इनमें शूरसेन की राजधानी मथुरा, पांचाल की राजधानी अहिच्छत्र तथा काम्पिल्य और अंग की राजधानी चम्पा थी। चेदि महाजनपद की राजधानी शुक्तिमती अथवा सोत्थिवती थी, जो वर्तमान बुन्देलखण्ड क्षेत्र में स्थित मानी जाती है। काम्पिल्य वस्तुतः दक्षिण पांचाल की राजधानी थी, चेदि की नहीं। अतः चेदि को काम्पिल्य से जोड़ना गलत है और यही असंगत युग्म है। महाभारत में चेदि नरेश शिशुपाल का उल्लेख मिलता है, जो श्रीकृष्ण का प्रतिद्वन्द्वी था। इन सोलह महाजनपदों में मगध, कोसल, वत्स तथा अवन्ति सर्वाधिक शक्तिशाली सिद्ध हुए।
Q163. निम्न में से कहाँ शेख हुसैनी गैसुदराज ने खानक़ाह स्थापित की थी ?
Right Answer: गुलबर्गा
शेख सैयद मुहम्मद हुसैनी गैसुदराज चिश्ती सिलसिले के प्रसिद्ध सूफी सन्त थे और शेख नसीरुद्दीन चिराग-ए-दिल्ली के शिष्य थे। तैमूर के आक्रमण के बाद दिल्ली छोड़कर वे दक्षिण भारत आए और बहमनी सुल्तान फिरोजशाह बहमनी के काल में गुलबर्गा में बस गए, जहाँ उन्होंने अपनी खानकाह स्थापित की। इससे दक्षिण भारत में चिश्ती परम्परा का विस्तार हुआ। वे विपुल लेखन के लिए भी जाने जाते हैं और उन्हें दक्खिनी उर्दू गद्य के आरम्भिक लेखकों में गिना जाता है। गुलबर्गा स्थित उनकी दरगाह आज भी प्रमुख तीर्थस्थल है।
Q164. मध्यपाषाणकालीन स्थल ‘सराय नाहर राय’ स्थित है :
Right Answer: उत्तर प्रदेश में
सराय नाहर राय उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में स्थित एक महत्त्वपूर्ण मध्यपाषाणकालीन स्थल है, जिसका उत्खनन जी० आर० शर्मा ने करवाया। यहाँ से लघु पाषाण उपकरण अर्थात् माइक्रोलिथ, मानव कंकाल, पशु-अस्थियाँ तथा अग्निकुण्ड प्राप्त हुए हैं। यहाँ मिली सामूहिक शवाधान की व्यवस्था तथा एक कंकाल की पसली में धँसा हुआ अस्थि-बाणाग्र इस काल में हिंसक संघर्ष का प्रमाण देता है। इसी क्षेत्र के महदहा तथा दमदमा भी प्रसिद्ध मध्यपाषाणकालीन स्थल हैं। राजस्थान का बागोर तथा मध्य प्रदेश का भीमबेटका भी इसी काल से जुड़े हैं।
Q165. निम्नलिखित को कालक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही विकल्प चुनिए :
A. शुंग वंश
B. मौर्य वंश
C. सातवाहन वंश
D. हर्यक वंश
Right Answer: D, B, A, C
इन चारों राजवंशों का सही कालक्रम इस प्रकार है। हर्यक वंश मगध का प्राचीनतम प्रमुख राजवंश था, जिसकी स्थापना बिम्बिसार ने ईसा पूर्व छठी शताब्दी में की और अजातशत्रु इसका प्रतापी शासक रहा। मौर्य वंश की स्थापना चन्द्रगुप्त मौर्य ने 322 ईसा पूर्व में की और अशोक के काल में यह अपने चरम पर पहुँचा। शुंग वंश की नींव 185 ईसा पूर्व में पुष्यमित्र शुंग ने अन्तिम मौर्य शासक बृहद्रथ की हत्या करके रखी। सातवाहन वंश दक्षिण भारत में लगभग प्रथम शताब्दी ईसा पूर्व से उभरा, जिसका महान शासक गौतमीपुत्र सातकर्णी था।
Q166. निम्नलिखित में से कौन - सा यजुर्वेद का ब्राह्मण ग्रन्थ है ?
Right Answer: शतपथ
प्रत्येक वेद के साथ ब्राह्मण ग्रन्थ जुड़े हैं, जो यज्ञों की विधि तथा उनके अर्थ की व्याख्या करते हैं। शतपथ ब्राह्मण यजुर्वेद, विशेषकर शुक्ल यजुर्वेद, से सम्बद्ध है और यह सभी ब्राह्मण ग्रन्थों में सबसे विस्तृत एवं महत्त्वपूर्ण माना जाता है। इसमें सौ अध्याय होने के कारण ही इसका नाम शतपथ पड़ा। इसी में मनु एवं प्रलय की प्रसिद्ध कथा तथा विदेह माधव के पूर्व की ओर प्रसार का वर्णन मिलता है। ऐतरेय एवं कौषीतकि ऋग्वेद से, गोपथ अथर्ववेद से तथा पंचविंश एवं जैमिनीय सामवेद से जुड़े ब्राह्मण ग्रन्थ हैं।
Q167. निम्नलिखित में से किस सल्तनत शासक ने राजस्व का वार्षिक अनुमान करवाया था ?
Right Answer: फिरोजशाह तुगलक
सल्तनतकालीन शासकों में फिरोजशाह तुगलक ने राजस्व का वार्षिक अनुमान करवाया। उसने ख्वाजा हिसामुद्दीन को यह कार्य सौंपा, जिसने छह वर्ष तक सर्वेक्षण कर साम्राज्य की वार्षिक आय लगभग छह करोड़ पचहत्तर लाख टंका आँकी। यह अनुमान एक बार निश्चित होने के बाद स्थायी मान लिया गया और प्रतिवर्ष नई पैमाइश नहीं की गई, जिससे कृषकों को स्थिरता मिली। फिरोज ने अनेक अनुचित कर हटाए तथा केवल शरीयत-सम्मत चार कर रखे, सिंचाई हेतु नहरें बनवाईं और उन पर हक्क-ए-शर्ब नामक कर लगाया। अलाउद्दीन खलजी ने भूमि की वास्तविक पैमाइश पर आधारित व्यवस्था चलाई थी।
Q168. ‘एम्फोरा’ का सम्बन्ध था :
Right Answer: मृदभांड से
एम्फोरा एक विशिष्ट प्रकार का मृद्भाण्ड है, जिसकी पहचान लम्बी संकरी गर्दन, अण्डाकार शरीर तथा दोनों ओर लगे दो हत्थों से होती है। भूमध्यसागरीय क्षेत्र में इसका उपयोग शराब, जैतून का तेल तथा अन्य तरल पदार्थों के भण्डारण एवं समुद्री परिवहन के लिए किया जाता था। भारत में तमिलनाडु के अरिकामेडु से रोमन एम्फोरा के अनेक टुकड़े मिले हैं, जो संगमकाल में भारत तथा रोमन साम्राज्य के बीच सक्रिय व्यापारिक सम्बन्धों का ठोस पुरातात्त्विक प्रमाण हैं। ऐसे ही अवशेष कोल्हापुर तथा नेवासा से भी प्राप्त हुए हैं।
Q169. निम्नलिखित को कालक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही विकल्प चुनिए :
A. फर्रुखसियर
B. बहादुर शाह प्रथम
C. जहाँदर शाह
D. मुहम्मद शाह
Right Answer: B, C, A, D
औरंगजेब की मृत्यु 1707 में हुई, जिसके बाद उत्तरकालीन मुगलों का दौर आरम्भ होता है। बहादुर शाह प्रथम 1707 से 1712 तक शासक रहा, जिसे इतिहासकार खफी खाँ ने ‘शाह-ए-बेखबर’ कहा। उसके बाद जहाँदर शाह 1712 से 1713 तक रहा, जो जुल्फिकार खाँ की सहायता से गद्दी पर बैठा। फिर फर्रुखसियर 1713 से 1719 तक शासक रहा, जिसे सैयद बन्धुओं ने बैठाया और अन्ततः उन्होंने ही उसकी हत्या कर दी; उसी ने 1717 में अंग्रेजों को प्रसिद्ध फरमान दिया। इसके बाद मुहम्मद शाह ‘रंगीला’ 1719 से 1748 तक शासन करता रहा, जिसके काल में नादिरशाह का आक्रमण हुआ।
Q170. महात्मा बुद्ध की सुल्तानगंज की प्रसिद्ध मूर्ति निम्न में से किससे निर्मित थी ?
Right Answer: ताम्र से
सुल्तानगंज की प्रसिद्ध बुद्ध प्रतिमा बिहार के भागलपुर जिले के सुल्तानगंज से 1861 में रेल-निर्माण के दौरान प्राप्त हुई। यह ताम्र अर्थात् ताँबे से निर्मित है, लगभग सवा दो मीटर ऊँची तथा पाँच सौ किलोग्राम से अधिक भारी है और गुप्तकालीन धातु-ढलाई कला का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है। प्रतिमा में बुद्ध खड़ी मुद्रा में अभय मुद्रा प्रदर्शित करते हैं और उनका पारदर्शी प्रतीत होता चीवर सारनाथ शैली की विशेषता दर्शाता है। यह मूर्ति वर्तमान में इंग्लैण्ड के बर्मिंघम संग्रहालय एवं कला दीर्घा में रखी है।