Miscellaneous GK - Art and Culture: 25 MCQs with Answers

Art and Culture - Miscellaneous GK
Miscellaneous GK - Art and Culture

Miscellaneous GK- Art and Culture

Indian art, classical music, folk dances, festivals and cultural heritage MCQs for SSC, UPSC and state level competitive examinations.

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Q1. बस्तर के गोंचा उत्सव के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. तुपकी, बाँस से बनी एक नकली बंदूक है।

2. रथ यात्रा चालुक्य शासकों द्वारा शुरू की गई थी।

3. रथ यात्रा आषाढ़ शुक्ल दशमी को शुरू होती है और दुतिया पर समाप्त होती है।

Right Answer: 1, 2 और 3 तीनों सही हैं


Explanation:

गोंचा छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में मनाया जाने वाला पारंपरिक रथ यात्रा पर्व है, जिसे भगवान जगन्नाथ की पूजा से जोड़ा जाता है। इस उत्सव की सबसे विशिष्ट पहचान तुपकी है, जो बाँस से बनी एक नकली बंदूक होती है और जिससे मालवा फल की गोली छोड़कर रथ का स्वागत किया जाता है। इस परंपरा का आरंभ बस्तर के चालुक्य शासकों के काल में हुआ माना जाता है। यह यात्रा आषाढ़ शुक्ल पक्ष में आरंभ होकर कई दिनों तक चलती है। अतः तीनों कथन सही हैं।
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Q2. कर्नाटक संगीत में पाँच मात्राओं वाले लघु को किस जाति के नाम से जाना जाता है?

Right Answer: खंड


Explanation:

कर्नाटक संगीत की ताल पद्धति में लघु नामक अंग की मात्राएँ उसकी जाति पर निर्भर करती हैं। इस पद्धति में कुल पाँच जातियाँ मानी जाती हैं, जिनके अनुसार लघु की लंबाई बदलती रहती है। तिश्र जाति में लघु तीन मात्राओं का, चतुरश्र जाति में चार मात्राओं का, खंड जाति में पाँच मात्राओं का, मिश्र जाति में सात मात्राओं का तथा संकीर्ण जाति में नौ मात्राओं का होता है। प्रश्न में पाँच मात्राओं वाले लघु की बात कही गई है, जो खंड जाति का लक्षण है। अतः सही उत्तर खंड है।
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Q3. बाँस की छड़ियों का उपयोग करके किया जाने वाला बाँस नृत्य चेराव किस राज्य का लोक नृत्य है?

Right Answer: मिजोरम


Explanation:

चेराव मिजोरम का सबसे प्रसिद्ध पारंपरिक लोक नृत्य है और इसे बाँस नृत्य भी कहा जाता है। इस नृत्य में कलाकार ज़मीन पर आड़ी-तिरछी रखी बाँस की लंबी छड़ियों को एक निश्चित लय के साथ आपस में टकराते और खोलते हैं, जबकि नर्तकियाँ पारंपरिक पोशाक पहनकर उन छड़ियों के बीच से पैर बचाते हुए थिरकती हैं। यह नृत्य त्योहारों और विशेष अवसरों पर किया जाता है तथा मिजो संस्कृति की सशक्त पहचान माना जाता है। अतः सही उत्तर मिजोरम है।
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Q4. निम्नलिखित में से कौन सा कथन भारतीय शास्त्रीय संगीत के विकास को सही ढंग से दर्शाता है?

Right Answer: रागों का विकास जातियों से हुआ; 72-मेल वेंकटमाखी द्वारा रचित था


Explanation:

भारतीय शास्त्रीय संगीत में राग की अवधारणा प्राचीन जाति गायन से विकसित हुई है। भरत मुनि के नाट्यशास्त्र में जाति का विस्तृत विवेचन मिलता है और मतंग के बृहद्देशी में पहली बार राग शब्द का प्रयोग हुआ, अर्थात क्रम जाति से राग की ओर बढ़ा, उलटा नहीं। कर्नाटक संगीत की 72 मेलकर्ता पद्धति सत्रहवीं शताब्दी में वेंकटमाखी ने अपने ग्रंथ चतुर्दण्डिप्रकाशिका में प्रस्तुत की थी, न कि तेरहवीं शताब्दी में भरत ने। अतः चौथा कथन ही ऐतिहासिक दृष्टि से सही है।
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Q5. निम्नलिखित शास्त्रीय नृत्यों को आरंभिक ऐतिहासिक संदर्भों (सबसे पुराने से नवीनतम) के कालानुक्रमिक क्रम में व्यवस्थित करें: 1. भरतनाट्यम 2. मोहिनीअट्टम 3. कथक 4. मणिपुरी

Right Answer: 1 - 3 - 4 - 2


Explanation:

भरतनाट्यम सबसे प्राचीन शास्त्रीय नृत्य माना जाता है, क्योंकि इसका आधार भरत मुनि के नाट्यशास्त्र में मिलता है और तमिल क्षेत्र में यह सदियों से देवदासी परंपरा के रूप में जीवित रहा। कथक का उल्लेख कथाकार परंपरा के रूप में प्राचीन काल से मिलता है और मध्यकाल में यह दरबारी नृत्य बना। मणिपुरी नृत्य का उल्लेख मणिपुर की लाई हराओबा परंपरा तथा पंद्रहवीं शताब्दी के बाद वैष्णव प्रभाव के साथ मिलता है। मोहिनीअट्टम का लिखित उल्लेख सबसे बाद में, अठारहवीं-उन्नीसवीं शताब्दी में स्पष्ट होता है। अतः क्रम 1-3-4-2 है।
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Q6. निम्नलिखित में से कौन सा युग्म मंदिर की छत के आकार से सही सुमेलित है?

Right Answer: फमसाना - एक बिंदु तक उठने वाली स्लैब, सीधी ढलान


Explanation:

नागर शैली के मंदिरों में शिखर तीन प्रमुख प्रकार के होते हैं। लैटिना अथवा रेखा प्रासाद शिखर वर्गाकार आधार वाला होता है और उसकी दीवारें भीतर की ओर वक्र रूप में झुकते हुए शीर्ष तक जाती हैं। फमसाना शिखर लैटिना की तुलना में कम ऊँचा और अधिक चौड़ा होता है, जिसमें अनेक स्लैब सीधी ढलान के साथ एक केंद्रीय बिंदु तक उठती हैं। वलभी शिखर आयताकार आधार पर वैगन अर्थात छकड़े की छत जैसा गोलाकार होता है। इस आधार पर केवल फमसाना वाला युग्म सही सुमेलित है।
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Q7. अरुणाचल प्रदेश की तुत्सा जनजाति द्वारा मनाया जाने वाला पोंगटू महोत्सव मुख्य रूप से बाजरा की कटाई से पहले किस देवता से आशीर्वाद लेने के लिए मनाया जाता है?

Right Answer: रंगखोथक


Explanation:

पोंगटू अरुणाचल प्रदेश की तुत्सा जनजाति का प्रमुख कृषि पर्व है, जो तिरप जिले में अप्रैल के आसपास मनाया जाता है। यह उत्सव बाजरा की फसल काटने से ठीक पहले आयोजित होता है और इसमें समुदाय अपने प्रमुख देवता रंगखोथक से अच्छी उपज, वर्षा तथा गाँव की सुरक्षा का आशीर्वाद माँगता है। इस अवसर पर सामूहिक नृत्य, पारंपरिक पेय तथा पशु बलि की परंपरा भी रही है। डोनयी-पोलो आदि जनजाति की सूर्य-चंद्र उपासना है, रंगफ्रा तांगसा समुदाय से तथा न्येगी-न्यापा अन्य परंपरा से जुड़ा है।
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Q8. रिक्त स्थान भरें: हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की तीनताल में, खाली _____ मात्रा पर होती है।

Right Answer: 9


Explanation:

तीनताल हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत का सबसे प्रचलित ताल है, जिसमें कुल सोलह मात्राएँ होती हैं और ये चार-चार मात्राओं के चार विभागों में बँटी रहती हैं। इसमें तीन ताली तथा एक खाली होती है, और इसी कारण इसका नाम तीनताल पड़ा। पहली ताली अर्थात सम पहली मात्रा पर, दूसरी ताली पाँचवीं मात्रा पर तथा तीसरी ताली तेरहवीं मात्रा पर आती है। खाली नवीं मात्रा पर पड़ती है, जहाँ हाथ से ताली न देकर हाथ को दूर हटाया जाता है। अतः सही उत्तर 9 है।
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Q9. रिक्त स्थान भरें: कालबेलिया नृत्य _____ की गति को दर्शाता है।

Right Answer: सांप


Explanation:

कालबेलिया राजस्थान की कालबेलिया जनजाति का पारंपरिक लोकनृत्य है, जिसे प्रायः सपेरा नृत्य भी कहा जाता है। इस समुदाय का पारंपरिक व्यवसाय साँप पकड़ना और उनका विष बेचना रहा है, इसलिए उनकी नृत्य शैली में साँप की लहरदार गति का अनुकरण किया जाता है। नर्तकियाँ काले घाघरे में शरीर को लचीले ढंग से घुमाती हैं और पूँगी तथा खंजरी की धुन पर नृत्य करती हैं। वर्ष 2010 में यूनेस्को ने इसे मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया। अतः सही उत्तर सांप है।
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Q10. निम्नलिखित शास्त्रीय नृत्यों को आरंभिक ऐतिहासिक संदर्भों (सबसे पुराने से नवीनतम) के कालानुक्रमिक क्रम में व्यवस्थित करें:

1. भरतनाट्यम
2. मोहिनीअट्टम
3. कथक
4. मणिपुरी

Right Answer: 1 - 3 - 4 - 2


Explanation:

भरतनाट्यम का उल्लेख सबसे प्राचीन है, क्योंकि इसकी जड़ें भरत मुनि के नाट्यशास्त्र तथा तमिलनाडु के मंदिर नृत्य सादिर से जुड़ी हैं। इसके बाद कथक आता है, जिसका आरंभ उत्तर भारत के कथावाचकों से हुआ और मध्यकाल में यह दरबारी नृत्य बना। तीसरे स्थान पर मणिपुरी है, जो मणिपुर की लाई हराओबा परंपरा से विकसित होकर वैष्णव भक्ति काल में स्थापित हुआ। सबसे बाद में मोहिनीअट्टम का उल्लेख मिलता है, जो केरल में लगभग सोलहवीं–अठारहवीं शताब्दी में विकसित हुआ। अतः सही कालानुक्रम 1 - 3 - 4 - 2 है।
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Published: 31 July 2026 | Last Updated: 03 September 2026 |


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Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

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I am an educational content creator dedicated to making learning simple, engaging, and accessible for students preparing for competitive exams. He specializes in creating high-quality study materials, including notes, multiple-choice questions (MCQs), previous year question papers, practice tests, and exam-oriented resources.

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