Hindi Grammar - उपसर्ग
Hindi Grammar
किस विकल्प में उपसर्ग विभाजन नियमानुसार है ?
Options:
- अपरिग्रह, अपरोक्ष, अपर्ण - 'अप' उपसर्ग
- आरण्यक, आवश्यक, आधुनिक - 'आ' उपसर्ग
- निश्शुल्क, निष्पक्ष, निस्स्वार्थ - 'निस्' उपसर्ग
- व्याधि, वीक्षण, व्यतिरेक - 'वी' उपसर्ग
Right Answer: निश्शुल्क, निष्पक्ष, निस्स्वार्थ - 'निस्' उपसर्ग
(3) निश्शुल्क, निष्पक्ष, निस्स्वार्थ - 'निस्' उपसर्ग संस्कृत व्याकरण के नियमानुसार, 'निश्', 'निष्' और 'निस्' से शुरू होने वाले शब्दों में मूल रूप से 'निस्' उपसर्ग ही होता है। संधि नियमों के कारण विसर्ग या 'स्' का रूप बदलकर 'श्' या 'ष्' हो जाता है:
- निश्शुल्क: निस् + शुल्क (स् का श् होना)
- निष्पक्ष: निस् + पक्ष (स् का ष् होना)
- निस्स्वार्थ: निस् + स्वार्थ अतः इस विकल्प में उपसर्ग का विभाजन पूर्णतः नियमानुसार है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
(1) अपरिग्रह, अपरोक्ष, अपर्ण - 'अप' उपसर्ग यह विकल्प गलत है क्योंकि सभी शब्दों में 'अप' उपसर्ग नहीं है:
- अपरिग्रह: अपि/अ + परिग्रह (यहाँ 'अ' उपसर्ग है, 'अप' नहीं)।
- अपरोक्ष: अ + परोक्ष (जो प्रत्यक्ष न हो - यहाँ 'अ' उपसर्ग है)।
- अपर्ण: अ + पर्ण (बिना पत्तों का - यहाँ 'अ' उपसर्ग है)।
(2) आरण्यक, आवश्यक, आधुनिक - 'आ' उपसर्ग यह विकल्प गलत है क्योंकि ये शब्द उपसर्ग से नहीं, बल्कि प्रत्यय के योग से बने हैं:
- आरण्यक: अरण्य + अक (प्रत्यय)
- आवश्यक: अवश + यक/इक (प्रत्यय)
- आधुनिक: अधुना + इक (प्रत्यय) इनमें 'आ' उपसर्ग नहीं है, बल्कि प्रत्यय लगने के कारण आदि-स्वर (पहला अक्षर) 'अ' से 'आ' में बदल गया है।
(4) व्याधि, वीक्षण, व्यतिरेक - 'वी' उपसर्ग यह विकल्प व्याकरण की दृष्टि से अशुद्ध है क्योंकि हिंदी या संस्कृत में 'वी' (बड़ी ई) नाम का कोई उपसर्ग नहीं होता। इन सभी शब्दों में 'वि' (छोटी इ) उपसर्ग है:
- व्याधि: वि + आधि
- वीक्षण: वि + ईक्षण (यहाँ 'वि' का 'इ' और 'ईक्षण' का 'ई' मिलकर दीर्घ संधि से 'वीक्षण' बना है, पर मूल उपसर्ग 'वि' ही है)।
- व्यतिरेक: वि + अतिरेक
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